उत्तराखंड ने रचा इतिहास, नेपाल को भेजा 05 टन हिमालयन ट्राउट मछली का पहला निर्यात कंसाइनमेंट, कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने वर्चुअली दिखाई हरी झंडी, मत्स्य पालकों के लिए खुले अंतरराष्ट्रीय बाजार के द्वार

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  • उत्तराखंड के मत्स्य क्षेत्र में ऐतिहासिक शुरुआत: नेपाल भेजा गया 05 टन हिमालयन ट्राउट का पहला कंसाइनमेंट
  • कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने वर्चुअल रूप से फ्लैग ऑफ कर की शुरुआत

देहरादून : उत्तराखंड के मत्स्य क्षेत्र ने एक नया इतिहास रचते हुए पहली बार पड़ोसी देश नेपाल को 05 टन हिमालयन ट्राउट मछली का निर्यात किया है। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री एवं जनपद प्रभारी मंत्री सौरभ बहुगुणा ने वर्चुअल माध्यम से प्रथम कंसाइनमेंट को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। सीमांत जनपद पिथौरागढ़ से नेपाल के लिए भेजी गई यह पहली खेप राज्य के मत्स्य उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

शुक्रवार को राज्य से पहली बार 05 टन ‘हिमालयन ट्राउट’ मछली का निर्यात पड़ोसी देश नेपाल को किया गया। इस अवसर पर प्रदेश के कैबिनेट और जनपद के प्रभारी मंत्री सौरभ बहुगुणा द्वारा वर्चुअल माध्यम से हरी झंडी दिखाकर इस प्रथम कंसाइनमेंट को फ्लैग ऑफ किया गया। मत्स्य निर्यात की यह पहली खेप सीमांत जनपद पिथौरागढ़ से नेपाल के लिए रवाना की गई। राज्य में मत्स्य विपणन के प्रथम चरण के तहत भारत-तिब्बत सीमा पुलिस को सफलतापूर्वक मछली की आपूर्ति की जा चुकी है, जिसमें जनपद उत्तरकाशी ने सर्वाधिक लगभग 130 क्विंटल ट्राउट की आपूर्ति कर अग्रणी भूमिका निभाई थी। आई.टी.बी.पी. को सफल सप्लाई के बाद, अब उत्तरकाशी जनपद के स्थानीय मत्स्य पालकों को सीधे अंतरराष्ट्रीय निर्यात बाजार से भी जोड़ा जा रहा है, जो राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

इस महत्वाकांक्षी निर्यात प्रक्रिया को धरातल पर सफल और सुचारू बनाने के लिए मत्स्य विभाग द्वारा कोल्ड-चेन (शीत-श्रृंखला), अत्याधुनिक पैकेजिंग और सुदृढ़ परिवहन व्यवस्थाओं को विशेष रूप से मजबूत किया गया है, ताकि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाली मछली बाजार तक पहुंचे।

मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा इन प्रयासों और इस वैश्विक बाजार की शुरुआत से राज्य के स्थानीय मत्स्य पालकों, मत्स्य सहकारी समितियों तथा स्वयं सहायता समूहों को सीधा आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। सरकार का यह कदम न केवल मत्स्य पालकों की आय को बढ़ाने में मददगार साबित होगा, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा कर रिवर्स पलायन को भी बढ़ावा मिलेगा।

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