ज्योतिर्मठ। सीमांत जनपद चमोली के जोशीमठ क्षेत्र में सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला। ज्योतिर्मठ के ऐतिहासिक नृसिंह मंदिर और रविग्राम सहित निकटवर्ती थैंग गांव के आराध्य जाख देवता अपनी 18 दिवसीय भव्य क्षेत्र भ्रमण यात्रा पूर्ण कर विधि-विधान के साथ पुनः गर्भगृह में विराजमान हो गए हैं। माघ माह के दूसरे गते से शुरू हुई इस देव यात्रा के दौरान जाख देवता ने विभिन्न तोकों और गांवों का भ्रमण कर भक्तों को दर्शन दिए। इस दौरान समूचा क्षेत्र भक्तिमय रहा और श्रद्धालुओं ने देवता को फल, चावल व वस्त्र अर्पित कर सुख-समृद्धि की मन्नतें मांगी। जहाँ जोशीमठ और रविग्राम के जाख देवता शनिवार सुबह गर्भगृह में विराजे, वहीं थैंग गांव में शुक्रवार देर शाम भारी जनसमूह की मौजूदगी में देवता को प्रतिष्ठित किया गया।
परंपराओं का निर्वहन: एक वर्ष पांडव नृत्य तो दूजे वर्ष जाख यात्रा
पहाड़ों में जाख देवता को भूमि, जल और जनमानस के रक्षक ‘क्षेत्रपाल’ के रूप में पूजा जाता है। स्थानीय परंपरा के अनुसार, यहाँ एक वर्ष पांडव नृत्य और एक वर्ष जाख देवता की यात्रा का आयोजन होता है। इसी क्रम में अब जाख देवता की यह विशेष यात्रा अगले दो वर्षों के अंतराल के बाद वर्ष 2028 में आयोजित होगी। वर्तमान में इन दुर्लभ परंपराओं को जीवित रखने का श्रेय स्थानीय हक-हकूकधारियों को जाता है, जो आधुनिक दौर में भी अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए हैं। थैंग गांव में हुए समापन समारोह के अवसर पर ग्राम प्रधान मीरा देवी, मेला कमेटी अध्यक्ष भरत सिंह पवार और मुख्य पुजारी शंकर सिंह चौहान सहित सैकड़ों भक्तों ने क्षेत्र की खुशहाली के लिए प्रार्थना की।
चांई गांव में अभी जारी है देव-आशीर्वाद का सिलसिला
एक ओर जहाँ अधिकांश क्षेत्रों में जाख देवता गर्भगृह में विराजमान हो गए हैं, वहीं चांई गांव में अभी भी देव-उत्सव की रौनक बनी हुई है। स्थानीय निवासी अखिलेश ने बताया कि चांई गांव के जाख देवता अभी कुछ और दिन अपने भक्तों के बीच रहकर उन्हें आशीर्वाद देंगे। यहाँ की परंपरा के अनुसार, जाख देवता के ‘पश्वा’ (अवतरित होने वाले व्यक्ति) स्वयं गर्भगृह में विराजमान होने का शुभ दिन निर्धारित करते हैं। जब तक वह तिथि नहीं आती, तब तक गांव में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान जारी रहेंगे, जिसे देखने के लिए आस-पास के क्षेत्रों से भी लोग पहुँच रहे हैं।…
