मैदयुल धार देवी रथ यात्रा का भव्य आयोजन, भूमियाल भतता और मुखौटा नृत्य ने मोहा मन

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चमोली : जनपद के ज्योर्तिमठ विकासखंड के कल्प और पैनखंडा क्षेत्र की आस्था का केंद्र कालिंका देवी मैदयुल धार देवी रथ यात्रा अपने 9 माह के लंबे भ्रमण के बाद अब समापन की ओर है। इसी कड़ी में भरकी के मगरा धार तोक में सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में भूमियाल देवता का ‘भता’ (भोज) पंचों द्वारा बड़े ही हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया गया। क्षेत्र की रक्षा के प्रतीक माने जाने वाले भूमियाल देवता, इस यात्रा के मुख्य आह्वानकर्ता हैं, जिनकी पवित्र छड़ी और कटार पूरी यात्रा के दौरान साथ चलती है। इस अवसर पर भूमियाल देवता के पस्वा (अवतार) द्वारा भगवती को भत्ता अर्पित किया गया और देवी ने अपने मैतियों व भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया।

सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन: मुखौटा और गोडित नृत्य

धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पंचनाम देवताओं के चौक में आयोजित भव्य मुखौटा नृत्य आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। ढोल वादक दीपक कुमार के कुशल निर्देशन में बेदी-वेदा, गणेश, ब्रह्मा, कोडिया, कनाडा, नाथू पांडे और नारद मुनि जैसे पौराणिक पात्रों का सुंदर मंचन किया गया। इन पात्रों ने नृत्य के माध्यम से पूरी यात्रा का विवरण प्रस्तुत किया और विभिन्न गांवों की व्यवस्थाओं व जनसमस्याओं को अनूठे ढंग से साझा किया। इसके साथ ही गोडित नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस धार्मिक महाकुंभ में कल्प और पैनखंडा क्षेत्र के दूरस्थ गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे। कार्यक्रम में कालिंका देवी की प्रतिनिधि कातकी देवी सहित मायाधार, नंदा देवी, खालधार और भूमियाल देवता के पस्वाओं ने शिरकत की। आयोजन को सफल बनाने में मेला समिति के अध्यक्ष व सचिव हर्षवर्धन फर्स्वाण, कोषाध्यक्ष नंदा सिंह नेगी, पुजारी गुड़बीर सिंह चौहान और जागर गायक लक्ष्मण पंवार सहित प्रदीप पंवार, महेंद्र सिंह रावत और अरविंद फर्स्वाण जैसे अनेक गणमान्य व्यक्तियों का विशेष सहयोग रहा।

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