मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर पौड़ी में सात स्थानों पर राज्य स्तरीय आपदा मॉक ड्रिल, परखी गयी तैयारियां

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पौड़ी: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुपालन में जनपद में गुरुवार को मानसून पूर्व तैयारियों पर व्यापक राज्य स्तरीय आपदा मॉकड्रिल का आयोजन किया गया। संभावित प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के उद्देश्य से जिले के सात संवेदनशील स्थलों पर अलग-अलग आपदा परिदृश्यों का सजीव अभ्यास कराया गया। इसमें नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि, भूस्खलन तथा बादल फटने जैसी परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों की कार्ययोजना, विभागीय समन्वय और संसाधनों की उपलब्धता का परीक्षण किया गया। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया के नेतृत्व में पूरे अभ्यास की कलेक्ट्रेट सभागार स्थित एकीकृत कंट्रोल रूम से पल-पल निगरानी की गई तथा विभिन्न टीमों के बीच समन्वय बनाए रखते हुए व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता का आकलन किया गया।

कंट्रोल रूम में उपस्थित जिलाधिकारी ने बताया कि आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम को सुबह 9:15 बजे सतपुली-गुमखाल मार्ग पर भूस्खलन से सड़क अवरुद्ध होने तथा 20 से 30 लोगों के फंसे होने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचा और एक घायल को एंबुलेंस से हंस फाउंडेशन अस्पताल, सतपुली भेजा गया। इसके बाद सुबह 9:20 बजे थलीसैंण क्षेत्र में बादल फटने का परिदृश्य तैयार किया गया, जिसमें 25 लोगों के प्रभावित होने, दो लोगों की मृत्यु तथा तीन गंभीर घायलों को जिला अस्पताल रेफर करने और अन्य प्रभावितों को सुरक्षित निकालने का अभ्यास किया गया।

सुबह 9:25 बजे कोटद्वार के सिम्बलचौड़ क्षेत्र में सुखरौ नदी का जलस्तर बढ़ने की सूचना पर राहत दल ने 15 से 20 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया तथा दो घायलों को अस्पताल भेजा। वहीं सुबह 9:43 बजे श्रीनगर के फरासू क्षेत्र में भूस्खलन से राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध होने और 80 से 100 लोगों के फंसे होने के परिदृश्य में प्रशासन ने तत्काल राहत सामग्री भेजी, छांतीखाल मार्ग से यातायात डायवर्ट किया तथा जेसीबी मशीनों की मदद से मार्ग सुचारू करने का अभ्यास किया। इसी दौरान धारी देवी के समीप गोवा बीच क्षेत्र में अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ने से राष्ट्रीय राजमार्ग जलमग्न होने की स्थिति का भी अभ्यास किया गया। राहत एवं बचाव दल ने तीन घायलों का रेस्क्यू कर उपचार के लिए भेजा तथा खांकरा मार्ग से यातायात डायवर्ट किया। इसके बाद सुबह 10:17 बजे अल्केश्वर घाट में अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ने की सूचना पर तीन घायलों को बेस अस्पताल पहुंचाया गया तथा 20 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का अभ्यास किया गया। वहीं सुबह 10:25 बजे लक्ष्मणझूला क्षेत्र में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के परिदृश्य में जिला प्रशासन, पुलिस एवं आपदा प्रबंधन की संयुक्त टीम ने विभिन्न घाटों से लगभग 2500 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाकर बड़े स्तर पर राहत एवं निकासी अभियान का सफल अभ्यास किया।

जिलाधिकारी ने बैठक में आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी विभागों की कार्ययोजना, तैयारियों एवं उपलब्ध संसाधनों की समीक्षा करते हुए विभागों के बीच बेहतर समन्वय एवं त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आपदा की स्थिति में किसी भी स्तर पर संचार अथवा समन्वय में कमी नहीं आनी चाहिए। घटना की सूचना मिलते ही संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी आवश्यक उपकरणों के साथ तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का आकलन करें तथा राहत एवं बचाव कार्य बिना विलंब प्रारंभ करें।

उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए कि आपदा के दौरान प्रभावित क्षेत्रों में बिजली, पेयजल, चिकित्सा सहित अन्य आवश्यक सेवाओं की शीघ्र बहाली एवं उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि आमजन को तत्काल राहत मिल सके। साथ ही डीपीआरओ को निर्देशित किया कि एडीओ (पंचायत) भी आपदा के समय ग्राउंड लेवल पर सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत सदस्यों के साथ-साथ महिला मंगल दलों और युवक मंगल दलों को भी आपदा प्रबंधन व्यवस्था से जोड़ने पर बल देते हुए कहा कि स्थानीय सहभागिता से प्रारंभिक सूचना, समन्वय तथा राहत एवं बचाव कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

जिलाधिकारी ने कहा कि सभी विभाग अपने क्षेत्र में उपलब्ध जेसीबी मशीनों की अद्यतन सूची तैयार रखें। संचालकों के संपर्क नंबर विभागों के पास उपलब्ध होने के साथ-साथ संबंधित जेसीबी मशीनों पर भी स्पष्ट रूप से अंकित रहें, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया जा सके। उन्होंने घायल अथवा प्रभावित व्यक्तियों को शीघ्र चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था हर समय तैयार रखने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि ‘आपदा से पूर्व तैयारी, आपदा के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया तथा आपदा के बाद राहत एवं पुनर्वास’ तीनों चरणों में किसी भी विभाग को संसाधनों की कमी नहीं होनी चाहिए। सभी विभाग आवश्यक उपकरणों, मशीनरी, वाहनों, मानव संसाधनों एवं अन्य जरूरी संसाधनों की उपलब्धता पहले से सुनिश्चित रखें, जिससे प्रत्येक परिस्थिति में राहत, बचाव एवं पुनर्वास कार्य निर्बाध और प्रभावी ढंग से संचालित किए जा सकें।

जिलाधिकारी ने बताया कि राज्य स्तरीय मॉक अभ्यास के दौरान सभी विभागों ने बेहतर समन्वय के साथ राहत एवं बचाव अभियान का सफल संचालन किया। विभिन्न स्थलों पर निर्धारित परिदृश्यों के अनुरूप कार्रवाई कर आपदा प्रबंधन तंत्र की तत्परता एवं क्षमता का परीक्षण किया गया। अभ्यास के उपरांत इंसीडेंट कमांडरों ने डी-ब्रीफिंग के माध्यम से संपूर्ण संचालन की समीक्षा करते हुए उपलब्ध संसाधनों, कार्यप्रणाली एवं सुधार की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि ऐसे मॉक अभ्यास आपदा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, व्यवहारिक एवं सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे वास्तविक आपदा के समय त्वरित, समन्वित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित होगी। उन्होंने अभ्यास के दौरान चिन्हित कमियों का समयबद्ध निराकरण करने तथा राहत एवं बचाव उपकरणों, मानव संसाधनों एवं संचार तंत्र की नियमित समीक्षा कर उन्हें सदैव कार्यशील बनाए रखने के निर्देश दिए।

इस दौरान एसएसपी सर्वेश पंवार, सीडीओ अशोक जोशी, एडीएम एफ आर चौहान, सीएमओ डॉ शिवमोहन शुक्ला, सीवीओ डॉ विशाल शर्मा, एएसपी अनूप काला, अर्थ एवं संख्याधिकारी राम सलोने, अधीक्षण अभियंता लोनिवि महिपाल सिंह चौहान, अधिशासी अभियंता लोनिवि विवेक सेमवाल, जल संस्थान टी एस रावत, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी दीपेश काला, मुख्य अग्निशमन अधिकारी राजेंद्र खाती, जिला पूर्ति अधिकारी अरुण वर्मा, एआरटीओ मंगल सिंह, ईओ नगर पालिका संजय कुमार, एडीपीआरओ प्रदीप सुंदरियाल समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

 

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