PRASHAST 2.0 App से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की प्रारंभिक पहचान को मिलेगा नया आयाम

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पौड़ी गढ़वाल। जिला परियोजना अधिकारी समग्र शिक्षा पौड़ी अत्रेश सयाना ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप प्रत्येक बच्चे को समान, गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से समग्र शिक्षा पौड़ी द्वारा विद्यालयों में समावेशी शिक्षा को सुदृढ़ करने तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (Children with Special Needs–CWSN) की समय पर पहचान एवं आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

समावेशी शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को सामान्य कक्षा में प्रवेश दिलाना नहीं, बल्कि उनकी व्यक्तिगत आवश्यकताओं को समझते हुए उन्हें स्वीकार्यता, सम्मान, समान अवसर, आवश्यक शैक्षिक सहयोग एवं सीखने के अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना है। इसी दिशा में PRASHAST (Pre-Assessment Holistic Screening Tool) App शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहल के रूप में उपयोगी साबित हो रहा है।
समग्र शिक्षा, जनपद पौड़ी गढ़वाल द्वारा जनपद के समस्त विकासखंडों में PRASHAST 2.0 App के माध्यम से विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की दिव्यांगता-आधारित स्क्रीनिंग एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) की पहचान हेतु विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है।

जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक अंशुल बिष्ट ने बताया कि यह अभियान राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं समावेशी शिक्षा की भावना के अनुरूप प्रत्येक बच्चे को उसकी आवश्यकता के अनुसार गुणवत्तापूर्ण एवं समान शैक्षिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। अभियान के अंतर्गत जनपद के राजकीय विद्यालयों, राजकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों एवं निजी विद्यालयों में कक्षा 1 से 12 तक अध्ययनरत विद्यार्थियों को शामिल किया जाना है।
PRASHAST 2.0 App का उद्देश्य विद्यालय स्तर पर ऐसे बच्चों की प्रारंभिक पहचान में शिक्षकों की सहायता करना है, जिन्हें सीखने अथवा विकास से संबंधित अतिरिक्त शैक्षिक सहयोग की आवश्यकता हो सकती है। इनमें ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD), अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD), विशिष्ट अधिगम अक्षमताएं जैसे डिस्लेक्सिया, डिस्ग्राफिया एवं डिस्कैल्कुलिया, बौद्धिक अक्षमता, सेरेब्रल पाल्सी, श्रवण एवं दृष्टिबाधिता, वाणी एवं भाषा संबंधी कठिनाइयां तथा अन्य विकासात्मक समस्याएं शामिल हो सकती हैं।

शिक्षक हैं प्रारंभिक पहचान की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी

विद्यालय में बच्चे के साथ सबसे अधिक समय बिताने वाले शिक्षक ही उसके सीखने, व्यवहार, संचार एवं विकास में आने वाली विभिन्न कठिनाइयों को प्रारंभिक स्तर पर पहचान सकते हैं। प्रशस्त 2.0 App शिक्षकों को बच्चों की विविध सीखने की आवश्यकताओं को समझने तथा संभावित विशेष आवश्यकताओं के संकेतों को पहचानने में सहायता प्रदान करता है।

प्रारंभिक पहचान होने से बच्चे को समय पर आवश्यक शैक्षिक अनुकूलन, परामर्श, विशेषज्ञ सहयोग एवं उचित रेफरल उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे न केवल बच्चे की सीखने की क्षमता में सुधार होता है, बल्कि उसके आत्मविश्वास एवं समग्र विकास को भी बढ़ावा मिलता है।

जिला समन्वयक समग्र शिक्षा पौड़ी रीना रावत ने बताया कि जनपद पौड़ी में निजी विद्यालयों की तुलना में सरकारी विद्यालय प्रशस्त 2.0 पर ज्यादा गंभीरता से कार्य कर रहे हैं विकासखंड बीरोंखाल, थलीसैंण,पाबौ, खिर्सू से ट्यूटोरियल वीडियो ऑनबोर्ड में शिक्षकों की संख्या बाकी विकासखंडों की तुलना में अच्छी है।

समग्र शिक्षा पौड़ी द्वारा जिले के विद्यालयों में समावेशी शिक्षा की अवधारणा को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए शिक्षकों एवं संबंधित कार्मिकों को संवेदनशील एवं प्रशिक्षित करने पर निरंतर बल दिया जा रहा है। CWSN से संबंधित आवश्यकताओं को समझना, विद्यालयी वातावरण को अनुकूल बनाना, आवश्यक संसाधन एवं सहयोग उपलब्ध कराना तथा बच्चों को उनकी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करना इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास हैं।

विशेष रूप से पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में समय पर पहचान और सहायता उपलब्ध कराना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। ऐसे क्षेत्रों में प्रशस्त 2.0 जैसे डिजिटल माध्यम शिक्षकों को प्रारंभिक स्तर पर बच्चों की आवश्यकताओं को समझने और उन्हें उचित सहयोग एवं रेफरल से जोड़ने में सहायक हो सकते हैं।

प्रशस्त 2.0 App: जागरूकता से सहयोग तक

PRASHAST 2.0 App के माध्यम से शिक्षकों को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों से संबंधित आवश्यक जानकारी एवं संकेतों को समझने का अवसर मिलता है। प्रशिक्षण/मॉड्यूल के माध्यम से शिक्षक यह समझ सकते हैं कि कक्षा में किसी बच्चे की सीखने संबंधी कठिनाई को किस प्रकार पहचाना जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर आगे की सहायता के लिए क्या कदम उठाए जाएं।

यह समझना आवश्यक है कि प्रशस्त 2.0 किसी बच्चे का अंतिम चिकित्सीय या नैदानिक निदान करने का माध्यम नहीं है, बल्कि प्रारंभिक स्क्रीनिंग एवं संभावित आवश्यकता की पहचान में सहायता करने वाला एक महत्वपूर्ण उपकरण है। आवश्यकता के अनुसार आगे विशेषज्ञ मूल्यांकन एवं उपयुक्त हस्तक्षेप के लिए रेफरल किया जाना आवश्यक है।

हर बच्चे को मिले सीखने और आगे बढ़ने का अवसर

समावेशी शिक्षा तभी सार्थक होगी जब विद्यालय में प्रत्येक बच्चा स्वयं को स्वीकार किया हुआ, सुरक्षित, सम्मानित और सक्षम महसूस करे। किसी बच्चे की सीखने की गति, व्यवहार अथवा विकासात्मक विशेषता को उसकी क्षमता की सीमा नहीं माना जाना चाहिए। सही समय पर पहचान, उचित सहयोग और संवेदनशील शिक्षक उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।

समग्र शिक्षा पौड़ी का प्रयास है कि जिले का प्रत्येक विद्यालय ऐसा समावेशी वातावरण विकसित करे, जहां विशेष आवश्यकता वाले बच्चों सहित प्रत्येक विद्यार्थी को उसकी व्यक्तिगत क्षमता एवं आवश्यकता के अनुरूप सीखने, आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा को विकसित करने का समान अवसर प्राप्त हो।

“समावेशी शिक्षा केवल समान अवसर देने की पहल नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे की विशिष्ट क्षमता को पहचानकर उसे आगे बढ़ने का अवसर देने की प्रतिबद्धता है।”

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